दिल्ली में महिलयों की विस्थापन के विरुद्ध बहादुराना संघर्ष की रिपोर्टः प्रगतिशील महिल संगठन द्वारा

जांच रिर्पोट

        गोसिया काॅलोनी, महरौली स्थित 1100 परिवारों के आशियाने उजाड़े जाने व उनके संघर्ष पर पुलिस दमन के सदंर्भ में जांच रिर्पोट।
जांच की तिथि    ः    14.05.2013
जांच दल सदस्य    ः    शोभा एडवोकेट
                अध्यक्ष प्रमस
                पूनम कौशिक एडवोकेट
                महासचिव प्रमस
                के0 बी0 हिना एडवोकेट
                वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमस लायर्स यूनिट
                सुमन लता कटियार एडवोकेट
                कार्यकारिणी सदस्य प्रमस

9 मई, 2013 की रात लगभग 12 बजे प्रमस के साथियों को कुछ महिलाओं द्वारा जानकारी हुई कि चाणक्यपुरी पुलिस थाने के अन्दर लगभग 50 महिलाओं को बंद रखा गया है तथा उनके पास गोदियां बच्चे भी हैं तथा पुलिस उनसे बेहद बदसलूकी कर रही है। प्रमस महासचिव ने तुरन्त एसएचओ चाणक्यपुरी को फोन किया तो जानकारी हुई कि लगभग 16 महिलाओं को 188 आईपीसी के तहत केस बनाकर कोर्ट में पेश किया गया था तथा लगभग 40 महिलाओं को निजि मुचल्कै पर छोड़ा गया है और क्योंकि बोन्ड भरने में समय लगा इसलिए इतनी रात हो गई। उन्होनें स्पष्ट नहीं बताया कि महिलाऐं कौन हैं। 10 मई, 2013 को रात लगभग 11.45 बजे महिलाओं ने फिर फोन करके कहा कि उनके साथ पुलिस दुव्र्यवहार कर रही है जबकि वे अहमद पटेल से मिलने जा रही हैं। एसएचओ चाणक्यपुरी से प्रमस महासचिव ने बात की तो पता लगा कि अभी वे कर्बला के पास हैं और रोज रात को प्रदर्शन करती हैं। 11 मई की रात 12.00 बजे एक पीडि़त महिला ने प्रमस महासचिव को फोन कर बताया कि चाणक्यपुरी पुलिस लगभग 50 महिलाओं को ग्यारह मूर्ति पर रोक कर महिलाओं पर मार-पिट, गाली-गलौच कर रही है। एक महिला की हाथ की उंगली टूट गई है। महिलाओं और छोटे बच्चों को चोट आई हैं। प्रमस महासचिव ने पहले 100 नम्बर पर रिर्पोट दर्ज करवाई तथा फिर क्षेत्र के डीसीपी, एसबीएस त्यागी से फोन पर बातचीत की। उन्होनें कहा कि यें औरतें भाड़े की है। रोज सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लघंन करती है। पिछले 26 दिन से रोज आती है जब उनसे पूछा गया कि अहमद पटेल से आप उनको मिलवा क्यों नहीं देते तो उनका कहना था कि इसमें हम कुछ नहीं कर सकते।
        पुलिस के इस बर्बर रवैये तथा महिलाओं के चाणक्यपुरी थाना क्षेत्र में उन पर पिछले कई दिनों से हो रही हिंसा के कारणों की विस्तारपूर्वक जांच के लिए प्रमस ने इलाके में जाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी का निर्णय लिया।
        दिनांक 14.05.2013 को शाम 4.00 बजे अंधेरिया मोड़ स्थित गोसिया काॅलोनी में जांच दल ने पाया कि लगभग 500 परिवार जो सभी मुस्लिम है, प्लास्टिक सीट तथा कच्चे टैन्ट डालकर रह रहे है। स्थानीय महिलाओं ने हमें बताया कि 5 दिसम्बर, 2012 तक यहां लगभग 1100 परिवार (सभी मुस्लमान) पक्के घर बनाकर रहते थे तथा गोसिया काॅलोनी खसरा नम्बर 217 तथा 1153/3 में बसी हुई है। तथा 5 दिसम्बर, 2012 को उनके घर डीडीए के बुलडोजर ने गिरा दिए। बहुत से मजारों को क्षति पहुंची तथा गोसिया मस्जिद की ताजा बाउंड्री दरवाजा, वजूहखाने का उखड़ना सब साफ था। पुराना गेट भी मस्जिद के एक तरफ रखा गया था। इलाका वासियों ने नूरी मस्जिद की जो चारदीवारी बिल्कुल तोड़ दी थी वो भी दिखाई, मामा भान्जा की मजार, ऐतिहासिक स्मारक दिखाऐ। इलाके के वासियों ने वक्फ बोर्ड द्वारा जारी रसीदें दिखाई जो कि कुछ वर्ष पुरानी थी। अपने वोटर आई-कार्ड भी दिखाऐ जिनमें कुछ वासियों ने बताया कि उनके परिवार के लोग दुबई में नौकरी करने गए है तथा उनका पासपोर्ट गोसिया काॅलोनी के पते पर जारी किया गया है। पिछले 6 महिने से भारी सर्दी, ओलें और बरसात में, नन्हे बच्चे, बुजुर्गवार ने पतले प्लास्टिक टैन्ट में बेहद मुश्किलों में समय गुजारा। उन्होनें दावा किया कम से कम 10 मौतें ठंड के कारण हो गई। इलाके में रह रहे लोगों को शौचादि जाने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। महिलाओं व लड़कियों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ता है। छेड़खानी, तानाकशी जो कि डीडीए के पार्क में आने वालों द्वारा की जाती है जबकि वे नित्य क्रिया के लिए वहां जाती है। पिछले तीन-चार दिन से पुलिस इलाके को घेर रही है तथा महिलाओं को इलाके से बाहर निकलते समय उनका बुरका उतारकर देख रही है तथा कहीं बाहर जाने से रोक रही है। पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई का भारी नुकसान हुआ है। मकान ढहा दिये जाने के समय लोगों को अपना सामान निकालने का मौका तक नहीं दिया गया। जिसके कारण विद्यार्थियों के बस्ते, किताबें सब मलबे में दब कर नष्ट हो गए। मकान तोड़ दिये जाने के बाद इलाका वासियों ने शहरी विकास मंत्री श्री कमल नाथ के पास धरना दिया क्योंकि डीडीए ने डमोलिशन की थी। कई बार धरना देने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से दिनांक 26.02.2013 को शाम 6.00 बजे 24 अकबर रोड़ में स्थानीय वासियों सहित महमूद प्राचा (एडवोकेट), अब्बास नकवी, दो इमाम वाला एक प्रतिनिधि मंडल मिला। प्रतिनिधिमंडल से बाचचीत करते हुए सोनिया गांधी ने अपने राजनैतिक सलाहकार श्री अहमद पटेल को पूरे मशले की जानकारी देने के लिए नियुक्त किया।
        महिलाओं का कहना है कि श्री अहमद पटेल ने प्रतिनिधिमंडल को अशवस्थ किया कि वे शीघ्र ही मामले में जांच करेगें। निवासियों ने लगभग एक महिने तक जांच रिर्पोट का इन्तजार किया। महिलाओं ने यह भी बताया कि दिनांक 26.04.2013 को पुलिस गोसिया काॅलोनी स्थित नुरी मस्जिद में घुसी और नमाज अदा कर रहे लोगों को गिरफतार कर लिया। मस्जिद के पास खड़ी महिलाओं को बाल पकड़कर खिंचा। 7 लोगों के खिलाफ महरौली थाने में केस दर्ज किया गया जिसमें दो महिलाऐं भी हैं। 6 पुरूष अभी भी तिहाड जेल में है। महिला निवासीयेां का कहना है कि ये सब प्रयास नुरी मस्जिद तथा इलाके में स्थित सभी पुराने ढांचों के सबुत मिटाऐ जाने के लिए हैं ताकि भू-माफिया, राजनैतिज्ञ, पुलिस तथा वक्फ बोर्ड के सहयोग से जमीन हासिल कर सकें।
दिनांक 26.04.2013 की घटना के बाद लगभग एक सप्ताह तक प्रतिदिन 12 से 5 बजे तक इलाका वासी श्री अहमद पटेल से मिलने जाते और जब वे नहीं मिलते तो उनके निवास/कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि श्री पटेल तो रात के 10 बजे के बाद ही मिलेंगें। अब इलाकावासियों ने मजबूर होकर रात में आना शुरू किया। परन्तु श्री अहमद पटेल उन्हें नहीं मिले और अब औरतेें या उनके प्रतिनिधिमंडल को पुलिस अहमद पटेल के घर के पास पहुंचने ही नहीं देती और यह जानते हुए कि महिलाऐं बेहद गरीब तथा साधन हीन है और बिना किसी शक्तिशाली लोगों की पहचान के हैं। पुलिस ने उनके उपर बर्बर दमन शुरू किया जो कि लगातार बढ़ता जा रहा है। यह नहीं हो सकता कि श्री अहमद पटेल को इन घटनाओं की जानकारी ना हो परन्तु उन्होनें इन लोगों से सम्पर्क करने का अथवा इनके प्रतिनिधिमंडल से मिलने/ सम्पर्क करने का कोई प्रयास नहीं किया। और यदि उन्होनें कोई जांच रिर्पोट बना दी तो कम से कम इन प्रदर्शनकारियों को वे सूचित तो कर सकते हैं। अतैव पिछले कई रातों से जब लगभग 40-50 महिलाऐं (बारी-बारी से) श्री अहमद पटेल के घर के आस-पास पहुंचती तो चाणक्यपुरी पुलिस ही उन्हे मिलती। उन्हे लगभग पुरी रात चाणक्यपुरी थाने में दिनांक 08.05.2013 को रखा गया और 09 मई को 16 औरतों को कोर्ट में पेश किया गया। महिलाओं ने बताया कि उनकी गोद से बच्चे छिन लिए गए और पुलिस ने बच्चों की माओं को कुछ कागज पर साईन करने को कहा तथा उनसे यह भी जबरन वादा लिया गया कि पुलिस द्वारा पिटाई करने की बात वें जज को नहीं बताऐगी। महिला पुलिसकर्मीयों ने उनकी चुडी तोड़ दी और महिलाओं को नौंचा। जांच टीम को चोटों तथा नौचनें के निशान दिखाऐ गए। महिला पुलिस ने महिलाओं की छाती भी दबा दी। मर्द पुलिसवालों ने उनको गन्दी गालियां दी तथा उन्हें जलील किया और महिलाओं के अनुसार उनको धमकी भी दी कि अभी तो जेवर उतरवाये हैं बाद में तुम्हारे कपड़े भी उतरवायेेगें। 12 मई की रात को भी महिलाओं की पिटाई की गई जिसमें महिलाओं को चोट आई। 16 मई, 2013 को एक ही परिवार की दो महिलाओं तथा एक आदमी को महरौली पुलिस ने उठा लिया तथा देर रात तक भी वें नहीं लौटी थी। दुसरी औरत जो नौकरी के लिए साक्षताकार देने जा रही थी उसे भी पुलिस ने पकड लिया और देर रात तक नहीं छोड़ा था। महिलाऐं कहती हैं कि उन्हें पुलिस दुसरे थानों में लेकर जाती हैं तथा उनपर गोसिया काॅलोनी छोड़ देने का दबाव बनाती है।
दस्तावेजों के अवलोकन, निवासियों से हमारी बातचीत के बाद प्रमस टीम इस नतीजे पर पहुंची है कि:-
1.    पुरा क्षेत्र धरोहर क्षेत्र है।
2.    क्षेत्र की ऐतिहासिकता सभी प्रकार के भू-माफिया जिसमें सरकार तथा वक्फ बोर्ड के लोग भी शामिल हैं से पुरी तरह खतरे में है। गोसिया काॅलोनी खसरा नम्बर 217 तथा खसरा नम्बर 1151/3 पर स्थित है। पहला खसरा डीडीए ने 1974 के एक कोर्ट अवार्ड से अधिग्रहण किया था। दुसरा खसरा वक्फ जमीन पर हैं। 2009 में हुई एक सैल डीड हमें दिखाई गई जिससे पता लगा कि इस खसरे नम्बर की जमीन ओलिया मस्जिद की रहने वाली शबनम नामक महिला ने गाजियाबाद की बेबी तथा दिल्ली की श्रीराम काॅलोनी की फर्जाना को लगभग 4 करोड़ से भी अधिक में बेच दिया है। 8 अक्टूबर, 2009 को चार करोड़ सत्तर लाख में बेची गई लगभग 8000 वर्ग गज की जमीन अधिकारिक पंजीकरण द्वारा बेच दी गई है जिसमें 1808000/- रूप्ये की स्टाॅम्प डयूटी जमा की गई है। शबनम विक्रयकर्ता इसी गोसिया काॅलेानी की रहने वाली है जबकि इलाके के सभी घर तोड़ दिये है उसका घर ज्यों का त्यों है। इलाके की कुछ ओर चर्चा भी जरूरी है। गोसिया काॅलोनी की कुछ दूर पर समस तालाब है जिसके उत्तर में एक बुर्ज है। लोगों ने बताया कि दक्षिण की तरफ भी जंगल का इलाका था जो कि अब गायब हो गया है। उनका कहना है कि इस जंगल को एक लाला जसदेव राज ने हटवा दिया जिनका इसी क्षेत्र में नया घर बना हुआ है। गोसिया काॅलोनी के अन्दर ही नुरी मस्जिद तथा एक हाॅज है जो कि प्राचीन इमारत है। खसरा नम्बर 217 जिसमें मजार तथा मस्जिदें है जो कि राष्ट्रपत्र अधिसूचना 10.07.1980 का एक हिस्सा है। (मुस्लीम मजार मस्जिदों के साथ, दरगाह और हूजरा खसरा नम्बर 217)।
3.    जांच दल श्री मतीन अहमद दिल्ली वक्फ बोर्ड के चैयरमैन से भी 16 मई, 2013 को दोपहर में मिला। उन्होनें बताया कि खसरा नम्बर 217 जिसपर गोसिया काॅलोनी बसी है डीडीए ने 1974 एक कोर्ट अवार्ड से अधिग्रहित कर लिया था। वक्फ बोर्ड ने श्रीकमल नाथ शहरी विकास मंत्री को सम्पर्क किया है तथा क्षेत्र को डीनोटिफाई करने की प्रक्रिया लगभग पुरी कर ली है। दुसरी तरफ यह मना करते हुए कि गोसिया काॅलोनी में रहने वाले वक्फ के किरायेदार हैं। उन्होनें बताया कि जब जमीन हमारी है ही नही ंतो ना हमनें इन्हे रहने को कहा ना ही हम उन्हे हटने को कह रहे है। वो इन्कार करते है कि लोगों को कोई रसीद नहीं दी गई है और कहते हैं कि वो किरायेदार आवेदन पत्र दिखा रहे है। खसरा नम्बर 1151/3 के बारे में वो कहते है कि ये वक्फ बोर्ड की जमीन है। जब उन्हें सैल डीड की कापी दिखाई गई तो वो कहते हैं कि ये गैर कानूनी है। खैर कोई अभी तक कब्जा लेने नहीं आया है जब कोई आऐगा हम मामले मेें दखल करेगें।
टीम की टिप्पणियां:-
यह स्पष्ट है कि सघंर्ष करती महिलाऐं अपने परिवारों व अन्य परिवारों के साथ गोसिया काॅलोनी में कम से कम दो दसकों से रह रही हैं।  अगर वोटर आई कार्ड की दिनांक से जाना जाये। इस इलाके की ऐतिहासिक कीमत क्येांकि पूरे इलाके में कब्रिस्तान, मजार व मस्जिद फैली हुई है।  खसरा नम्बर 217 डीडीए की जमीन है- सरकार को कोई अधिकार नहीं है कि वो अचानक रहने वालों के घर तोड़े और लोगों को निस्तापित करें। हालांकि निवासियों की तरफ से लैफिटनैन्ट गर्वनर के दफतर व शहरी विकास मंत्रालय पर दरखास्त दी गई है लेकिन किसी को इन लोगों की कोई परवाह नहीं है। सरकार, डीडीए, वक्फ बोर्ड सब खुश ही कि यह जमीन खाली कर दी गई है।
खसरा नम्बर 1151/3 की कहानी अजीब है। एक सैल डीड दिखाती है कि एक इलाके की रहने वाली महिला ने इस पूरे खसरे को करोड़ों रूप्ये लेकर दो बाहरी महिलाओं को बेच दिया। खसरा वक्फ बोर्ड का था पर इसके चैयरमैन इस बिक्रि पर बिल्कुल परेशान नहीं है। वो कहते है कि अगर कोई इस जमीन को कब्जा करने आए तब हम सवाल को देखेगें।  सवाल ये है कि क्या ये खसरा असल में वक्फ बोर्ड का था ? सवाल ये भी है कि बेचने वाली महिला कौन है ? जब हमने शबनम के घर की तस्वीर लेने की चेष्टा की तो घर के अन्दर से कई लोग निकलकर आऐ जो हमारे साथ बहस करने लगे और हमें चले जाने को कहा। शबनम    कौन है और वक्फ बोर्ड क्यों बिक्रि के बारे में परेशान नहीं है?
यह स्पष्ट है कि केाई बडा भू-माफिया रैकेट है जिसकी नजर में गोसिया काॅलोनी के निवासी एक बडी किरकरी है और सभी इनसे ये इलाका खाली करा देना चाहते है। गोसिया काॅलोनी के निवासियों को आरोप है कि उन्हें किसी भू-माफिया जिसको शक्तिशाली राजनैतिज्ञों का संरक्षण प्राप्त है के इसारे पर ही उजाडा जा रहा है इसलिए पुलिस उन पर दमन कर रही है ताकि उनका सघंर्ष खत्म किया जा सके तथा उन पर इलाका छोडने का चैतरफा दबाव बनाया जा रहा है जैसा कि बहुत से परिवारों ने मजबुर होकर इलाका छोड़ कहीं ओर बसने का निर्णय किया है। दूसरी तरफ पुलिस दावा करती है कि गरीब निवासी भू-माफिया के इशारे पर आते हैं परन्तु पुलिस भू-माफिया की पहचान नहीं कर रही है। वक्फ बोर्ड के चैयरमैन सहमत है कि खसरा नम्बर 1151/3 वक्फ की जमीन है परन्तु उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा कि डीडीए द्वारा इलाके में बुलडोजर चला देने से। केन्द्रीय सरकार अचानक से बेघर कर दिए गए 1100 परिवारों के लिए कुछ नही कर रही । यह भी आश्चर्यजनक है कि करीब एक महिने से जबकि श्री अहमद पटेल के यहां लगातार पदर्शन कर रहे हैं। उन्होनें निवासियों की किसी प्रतिनिधिमंडल से ना तो कोई मुलाकात की और ना ही लोगों को कुछ ओर बताया जो कम से कम इन लोगों को यह तो बता सके कि असल में उनका केस देख कौन रहा है।
जांच दल की मांग:-
1.    गोसिया काॅलोनी के निवासियों को जहां वे लम्बे समय से रह रहे है वहीं वसने दिया जाये तथा डीडीए अथवा किसी अन्य ऐसेन्सी जिसके इशारे पर डीडीए नाच रही है (जैसे कि खसरा नम्बर 1151/3 का मामला) द्वारा जबरन भूमि अधिग्रहण तुरन्त बंद किया जाये। सरकार द्वारा पीडितों को मुवायजा दिया जाये जिससे वे अपना घर पुनः बना सके।
2.    काॅलोनी वासीयों पर विशेषकर महिलाओं पर पुलिस दमन अविलम्भ तुरन्त बंद किया जाए। संघर्ष के दौरान तथा नुरी मस्जिद मामले में भी बनाए गए सभी केसों को तुरन्त वापिस लिया जाये। महिलाओं की पिटाई के दोषी महिला तथा पुरूष पुलिसकर्मीयों के खिलाफ कार्यवाही की जाये।
3.    महरौली और चाणक्यपुरी थाने के थाना अध्यक्ष तथा सम्बन्धित डीसीपी के उपर कमान जिम्मेदारी के तहत कार्यवाही की जाये।
4.    पुरे देश में जनता जबरन भूमि अधिग्रहण लडने को मजबूर है जबकि सरकारें आम लोगों ेस एक इंच भूमि भी छीन लेना चाहती है इस संदर्भ में खसरा नम्बर 1151/3 की कहानी से पूरा षडयंत्र सामने आता है कि किस तरह से यह जमीन खरीदी व बेची गई और वक्फ बोर्ड को कोई परेशानी नहीं हुई। असल में कौन विक्रेता है और कौन खरीदार ? ऐसा लगता है कि पूरे प्रकरण में एक अत्यन्त शक्तिशाली भू-माििफया जिसे महत्वपूर्ण राजनितिज्ञयों तथा पुलिस का पुरा संरक्षण काम कर रहा है। अतः हम मांग करते हैं कि पुरी डील में सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायधीश द्वारा समयबद्ध जांच कराई जाए तथा इस पुरे अमूल्य कीमती तथा ऐतिहासिक भूमि को अधिग्रहीत करने के मामले में पुरा गठजोड है।

प्रमस द्वारा प्रैस सम्मेलन
में 17.05.2013 को जारी
शोभा, अध्यक्ष
पूनम कौशिक, महासचिव

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